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Tagged: दोस्त की बहन

उसकी गाण्ड तो.. हाय मार ही डाले

इसकी नायिका मेरे दोस्त की बहन है उसके बूब्स गजब के है और उसकी गाण्ड तो.. हाय मार ही डाले ऐसी ही है पहली चुदाई में उसका खून निकल गया और उसका कोमार्य भंग किया फिर क्या उसका बाद हमने बहुत बार जब इच्छा होती या जब मेरा लौड़ा खड़ा होता तन मैं चुदाई शुरू कर देता और वो भी बहुत गरम हो जाती चुदवाने के लिए

भाई के दोस्त संग नंगा बैठ बेशर्मी से चुदाई

भाई के दोस्त संग नंगा बैठ बेशर्मी से चुदाई किया मैंने और उसे चुदाई में एक्सपर्ट बना दिया और ये सब भाई के घर पे नही था तब हुआउसने लंड पे थुक लगा लगा के चोदा

बहना मेरी गोरी चुत वाली

दोस्तों यह कहानी आज से तीन साल पहले की है, दोस्तों मैंने अपनी इस कहानी को सिस्टर की गोरी गांड और गुलाबी चूत नाम दिया है | जब में 12th में था और मेरी...

चुत में जीभ जाते ही पता चला की माल ताजा है

ये कहानी एक कुवारी चुत वाली कमसिन जवान लड़की यानि मेरे दोस्त की बहन की कहानी है जिसकी चुत में जीभ जाते ही पता चला की माल ताजा है उस ताजे माल की सील तोड़ मैंने अपना कामरस भर दिया जवानी के सही वकत में कुवारी लड़की मिल गई और सोने पे सुहागा हो गया

दोस्ती का फर्ज अदा किया-16

मैंने भी उन्हें चूमना चालू किया और चूमते-चूमते मैं उनके कान के पास आया और फुसफुसा कर बोला- चाहता तो मैं भी तुम्हारे रस को पीना चाहता हूँ।  तो वो ख़ुशी से खिलखिलाकर हंस...

दोस्ती का फर्ज अदा किया-15

जैसे ही मेरी आँखें खुलीं.. तो मैंने आंटी का मुस्कुराता हुआ चेहरा सामने पाया.. मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ.. आप इतना मुस्कुरा क्यों रही हो?  तो वो बोलीं- बस ऐसे ही..  मैं बोला- अच्छा.. ऐसा...

दोस्ती का फर्ज अदा किया-14

फिर मैं अपने आपको सम्हालते हुए अपनी जेब में हाथ डालकर लौड़े को सही करने लगा.. क्योंकि उस समय मैंने सिर्फ लोअर ही पहन रखा था। मैं जल्दबाज़ी में चड्डी पहनना ही भूल गया था.....

दोस्ती का फर्ज अदा किया-13

लेकिन प्लान क्या था.. तो अब मैं अपना प्लान बताता हूँ.. विनोद का ध्यान हटते ही मैंने माया को देखते हुए कहा- आंटी आप ही कुछ बताओ न.. तो वो बोलीं- मैं क्या बताऊँ? मैंने...

दोस्ती का फर्ज अदा किया-12

फिर मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो मैं माया को देखकर एक पल के लिए घबरा सा गया था कि पता नहीं कहीं इन्होंने कुछ सुन या देख तो नहीं लिया ? पर दरवाजा...

दोस्ती का फर्ज अदा किया-11

मैंने दरवाजा बंद किया और उसकी आँखों में देखते हुए सोचने लगा.. बेटा राहुल.. तवा गर्म है.. सेंक ले रोटी.. पर मुझे इसके साथ ही एक तरफ यह भी डर था कि कहीं मैंने...

दोस्ती का फर्ज अदा किया-10

अब आगे.. फिर मैं वहीं उन दोनों का इंतज़ार करने लगा और आंटी जी भी अपने कमरे में चली गईं.. शायद कपड़े बदलने गई थीं.. क्योंकि उन कपड़ों में काफी सिकुड़न पड़ चुकी थी.....