मेरी और मेरी माँ की साले ने बजा डाली

गतांग से आगे …..

भेल वाला- जी मेम्साब कहिए कितनी तौल दूं…?

माँ- हमे ये नही चाहिएl

भेल वाला- तो फिर टाइम क्यों खराब कर रही है मुझे ये सब बेच कर घर भी जाना होता है पता नही आप लोगों को परेशान करने मे क्या मजा आता हैl

माँ- अर्रे मेरी बात तो सुनो अगर मैं तुझे इन सारी भेल के पैसे दे दूं तो…?

भेल वाला- मेम्साब क्यों मज़ाक कर रही है जाने दीजिए मुझे देर हो रही है

]तभी माँ ने 1000 का नोट निकाला और उसे देती हुई बोली तुम्हे 1 काम करना होगा

1000 का नोट देख कर उसकी आँखें चमक गयी थी पर वो कुछ समझ नही पा रहा था तब माँ खुल कर बोली

माँ- बात ये है कि इन 1000 क बदले तुझे हम दोनो को मज़ा देना होगा

वो परेशान सा हो गया तब मैने माँ की चूचियाँ दबा कर उसे दिखाते हुए कहा देखो इनको कितना मज़ा आएगा तुम्हे इनके साथ कभी देखी है ऐसे चूचियाँ..?

भेल वाले की कुछ झिझक कम हुई तो मैने उससे कहा ये टोकरी किनारे रख दो और अंदर चल कर पहले नहा लो

भेल वाला- मेम साहिबा कैसे बातें कर रही है भला इतने जाड़े मे वो भी रात को कोई नहाता है क्या..?

माँ- सबसे पहले तो तू ये मेमसाहिबा कहना बंद कर और अपना नाम बता और देख तू ये समझ कि तू पैसे दे कर किसी रंडी को चोदने जा रहा है इसलिए पूरी तराह से अपनी झीजक ख़तम कर दे और फिर जब तेरे सामने दो नंगी औरतें होंगी तुझे नहलाने के लिए तो भला तुझे जाड़ा कहाँ से लगेगा और पानी भी गरम होगा चल उतार डाल सारे कपड़े और हो जा नंगा l आप ये कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

उसने अपनी कमीज़ और धोती उतार दी अब वो सिर्फ़ बड़े से पटार वाली निक्कर मे था और माँ उसके चौड़े सीने पे हाथ फिरा रही थी और मैं सारे दरवाज़े बंद करने के बाद वाशरूम मे गयी तो माँ उसके नंगे बदन पे पानी डाल रही थी वो पटारे पे बैठा था

रूबी- माँ आप शावर क्यों नही चला देती बच्चे की तराह क्यों नहला रही हैं पानी डाल कर…?

माँ-अर्रे बेटी आज बहुत सालों बाद कोई कड़ियल जवान मिला है मुझे मन की करने दे कहाँ ऐसा मौका मिलता है आजा तू भी कपड़े उतार कर और हां रे हरामी तूने अभी तक अपना नाम नही बताया

भेल वाला- जी श्याम नाम है मेरा और ये आप मुझे गाली क्यों दे रही है..?

माँ- अर्रे भडवे तो तू भी दे ना गाली इससे चुदाई करने का मज़ा बढ़ जाता है मैने तो पहले ही कहा कि तू ये समझ तेरे सामन्मे दो रंडिया हैं

श्याम- आप लोग मा बेटी है…?

रूबी- हां रे मेरे बांके गबरू हम मा और बेटी है

श्याम- मैं तो कभी सपने मे भी नही सोच सकता कि ऐसा भी होता है

माँ- अभी तूने जाना ही क्या है अर्रे इसका बाप खुद अपने बेटे का लंड पकड़ कर इस चूत्मरानि की बुर मे धकेल्ता है और खुद अपना मेरे मूह मे डाले रहता है

और अब माँ के सामने मैं भी अपने सारे कपड़े उतार कर उसके चौड़े सीने पे हाथ फिराने लगी उसका सारा जिस्म गीला हो रहा था और बड़ी सी निक्कर के नीचे उसका लंड किसी साप की तराह फन उठा रहा था माँ ने उसकी निक्कर के उपर से ही उस पर हाथ रखा तो श्याम क मूह से सिसकारी निकल पड़ी

रूबी- माँ उतारो ना इसका कच्छा इतना बड़ा कच्छा तो पर्दे के काम आता है

माँ- बेटी तुझे पता नही ये ही पहनना चाहिए मर्दों को इसमे काफ़ी आराम मिलता है आजकल तो वो जोक्की ऐसे और फ्रांची चली है जिसमे कि पूरा लॉडा समा ही नही पाता अब देख कितना बड़ा लग रहा है इसमे और श्याम को कितना आराम मिल रहा होगा इसमे क्यों श्याम…?

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …

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