मेरी माँ ने मेरी पहली चुदाई अपने प्रेमी से करवाई

प्रेषक रूबी,

दोस्तों मैं उस वक़्त की कहानी से शुरुआत कर रही हूँ जब सर्वप्रथम चुदाई से मैं परिचित हुई थी.मेरे घर में मेरी माँ,मुझसे दो साल छोटी एक बहन और मैं हूँ. मेरे पिताजी की मृत्यु लगभग 15 वर्ष पूर्व हो गयी थी.पिताजी की मृत्यु हो जाने की वजह से घर चलाने के मामले में यही फर्क आया कि माँ को पेंसन मिलने लगी जिससे किसी तरह खर्च चल जाता था.

पिताजी कि मृत्यु के दो साल बाद की बात है मैं और मेरी बहन एक ही चारपाई पर सोये थे. उसी कमरे में माँ भी सोती थी लेकिन अलग बिस्तर पर.रात में करीब 12 बजे मेरी नींद अचानक खुल गयी मैंने कमरे में कुछ हलचल महसूस क़ी.हालांकि कमरे में अँधेरा था लेकिन मैं उसी अँधेरे में देखने क़ी कोशिश कर रही थी.

मुझे समझ में आया कि माँ के बिस्तर पर माँ के अलावा कोई और भी है.कौन हो सकता है? मेरे मन में विचार आने लगा.मैं बिना आवाज़ किये उठकर बैठ गयी और उत्सुकता से देखने लगी.उसके बाद जो मुझे दिखाई दिया उसको देखकर मै चकित हो गयी.मुझे माँ की गांड और चियरी हुई चुत में कुछ घुसता और निकलता हुआ दिखा.

मैं उस वक़्त बहुत छोटी थी मुझे इतना ही मालुम था कि लड़कियों की मूतने वाली छेद में लड़के अपना मूतने वाला डंडा डालते हैं तो बहुत अच्छा लगता है.आज मैं उस दृश्य को अपनी आँखों से साक्षात देख रही थी तो उत्तेजना स्वाभाविक बात थी. मेरी छोटी बहन मेरे साथ सोई थी मैंने उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा और खुद बा खुद मेरी अंगुलियाँ मेरी गीली हो चुकी चुत में सरकने लगीं.

उधर जितनी तेज़ी से माँ की चुत में लंड जा रहा था उतनी ही तेज़ी से मेरी अंगुलियाँ भी मेरी चुत को चोद रही थीं. कुछ देर बाद मुझे चरम आनंद की प्राप्ति हुई और मुझे नींद आ गयी.

अगले कुछ दिनों तक एकाध बार छोड़ कर मैं हर रात को माँ की चुदाई का इंतज़ार करने लगी और चुदाई की स्वक्रिया संपन्न करने लगी.अब अँगुलियों से मेरा मन भर गया था मेरी चुत को अब लंड की सख्त आवश्यकता महसूस होने लगी.लेकिन कोई चारा नज़र नहीं आ रहा था.

संयोग से एक रात को माँ को चुदवाते हुए देखकर मैं अपनी चुत में अंगुली कर रही थी कि मेरे मुंह से सीत्कार निकल गया जिसको माँ ने सुन लिया.मैं जान नहीं पाई कि क्या हुआ लेकिन अगले दिन माँ का व्यवहार कुछ बदला बदला सा था.मुझसे रहा नहीं गया मैंने माँ से पूछा,”क्या बात है माँ आज बहुत उदास हो ?”माँ ने कहा,”नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है.

” कुछ देर के बाद माँ ने मुझे अकेले में बुलाया और बोलीं,”कल रात……” इतना सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए.मेरा चेहरा उतर गया .तब माँ ने कहा,”देखो बेटी मेरी उम्र इस वक़्त 38 साल है और तुम जानती हो कि तुम्हारे पिताजी को मरे हुए दो साल से ऊपर हो गया…” और माँ का गला भर आया,आँखों से आंसू छलक पड़े.मैंने माँ को दिलासा दिया और कहा कोई बात नहीं है माँ.मेरी इस बात से उनका दिल कुछ हल्का हुआ औरवो बोलीं,”बेटी तुम नाराज़ नहीं हो मुझसे.”

मैंने कहा,”नहीं माँ इसमें नाराज़ होने वाली कौन सी बात है.ऐसा तो सबके साथ होता होगा.?” माँ के चहरे पर कुछ मुस्कान आई.मैं उस वक़्त कुछ और नहीं बोली.उस दिन के बाद मैं तीन रातों तक माँ के चुदाने का इंतज़ार करती रही लेकिन उनकी चुदाई नहीं हुई.अब मैं माँ की हमराज़ हो ही गयी थी.मैंने माँ से पूछा,”क्यों माँ, आजकल अंकल रात को नहीं आ रहे हैं, क्यों ?”

माँ ने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा,”तुमको क्या मतलब है इससे? ” मैं भी अब जवान हो रही थी और कई दिनों तक चुदाई का लाइव सीन देख चुकी थी.मेरी चुत को लंड की ज़रूरत सताने लगी थी ऊपर से माँ की हमराज़ भी हो गई थी जिसका नतीजा ये हुआ कि मैंने बे अदबी के साथ माँ से कह दिया,”माँ मुझे भी वही चाहिए जो तुम रोजाना रात को अपनी चुत में डलवाती हो” माँ तो बिलकुल सन्न रह गईं.उन्हें मुझसे ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी.

माँ मजबूर हो गयी थी.उसने कहा,”तुम्हारे चुत में भी लंड पेलवा दूंगी लेकिन ध्यान रहे तुम्हारी छोटी बहन को ये सब बातें मालूम नहीं होनी चाहिए.” मैंने ख़ुशी से उछलते हुए कहा,ओ के माँ ! तुम कितनी अच्छी हो.” दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

दोस्तों! जब मेरी मम्मी ने मुझसे कहा की वे मेरी चुत में लंड पेलवा देंगी तो मैं बहुत खुश हुई. मैं इस बात पर बहुत आह्लादित हुई कि मैंने मम्मी को मजबूर कर दिया था.उसी दिन जब मैं नहाने जा रही थी तो मम्मी बाथरूम में आ गयीं और दरवाजा बंद कर लिया और बोली,”अपने कपड़े उतारो.” मैंने मम्मी से कहा ,”माँ,मुझे शर्म आएगी.”

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …

Pages: 1 2 3

Terms of service | Privacy PolicyContent removal (Report Illegal Content) | Feedback