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गुलाब जामुन से रसीली उसकी चुत-3

अभी तक अपने पढ़ा मनोरमा पसीने में भीगी हुई थी, मेरा बदन भी पसीने में तर था, हम दोनों निढाल से एक दूसरे से लिपट कर पड़े रहे, कभी कभी मैं मनोरमा का मुँह चूम लेता तो कभी कभी वो मेरा मुँह चूम लेती।

मैं उसकी छोड़ी हुई सांसों में ही सांस ले रहा था। उसके भीतर की सांस के साथ अति सुगंध से मैं प्रसन्नचित लेटा हुआ था।

हम यूं ही काफी देर तक चिपके लिपटे लेते रहे, इतने उत्तेजक और मादक सेक्स के बाद थोड़ा सा सुस्ताना भी ज़रूरी था। और अब आगे की कहानी ..  थोड़ी देर बाद मैंने मनोरमा से पूछा- क्यों मेरी जान, अब तो नहीं कहेगी कि मैंने भेद भाव किया?

कह कर मैंने उसके गुलाब की पंखड़ियों के समान होंठ चूसे।

मनोरमा ने इठला कर कहा- अभी दो भेदभाव वाली चीज़ें तूने ठीक की हैं, अभी भी एक बाकी है।
मैंने पूछा- क्या बाकी रह गया? आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

अब तो मनोरमा शरमाते हुए बोली- तूने नेहा को कितनी अच्छी गालियाँ दी थीं… हमें कहाँ दीं?

मैंने कहा- .. नेहा ने भी तो गाली दी थी… वो भूल गई… अगर तू देगी तो मैं भी दूंगा।

मनोरमा धीमी आवाज़ में बोली- तू निलेश बड़ा कमीना है.. तू बदमाश है और दुष्ट भी है।

मैं हंसा- मनोरमा मेरी जान, ये कोई गाली है… ऐसी गाली मैं अगर नेहा को देता तो वो दस जूते मेरी गांड पर मारती… कहती, निलेश तू बहन का लौड़ा है…तू मादरचोद है…

मनोरमा बोली- इतनी भारी गाली हमसे न दी जाएगी।

मैं- दे हरामज़ादी रंडी की औलाद… कुतिया कहती है हम से ना दी जायगी… बहन चोद रांड… देती है या तुझे नंगी ही घसीट के ले जाता हूँ रंडी बाज़ार में जहाँ दिन में दो सौ लंड चोदेंगे साली कुतिया को…

मनोरमा ने अटकते अटकते हुए कहा- निलेश तू बहन…बहन…चो…चो..चोद कुत्ता कमीना है…तू बड़ा तंग करता है अपनी मनोरमा को…
‘हाँ, यह तो कुछ बात हुई ना मनोरमा मेरी … मैं तंग करता हूँ हराम की ज़नी चुदक्कड़ रांड को… बहन की लौडी.. प्यार कितना करता हूँ।’
‘नहीं तू कमीना तंग ज़्यादा करता है और प्यार कम… तू सच में बहुत हरामी है।’ मनोरमा ने आँखें छुपा के गाली वाली भाषा बोली। मज़े में उसके सुन्दर चहरे पर मुस्कराहट खेल रही थी। वो चाहे खुद गाली देने में शरमाती हो पर गाली सुनने में तो उसे खूब मज़ा आया था।
मैंने मनोरमा की चूचे कस के निचोड़े और निप्पल उमेठते हुए कहा- मनोरमा अब क्या सबूत दूं प्यार का.. फिर से गाना बजाऊँ…?
‘नहीं कमीने कुत्ते निलेश… पहले तो पूछ मेरे से कि मैं अब चुदाई में क्या चाहती हूँ… जो मैं कहूँ वो करेगा तो मान लूँगी कि तू सच में प्यार भी उतना ही करता है जितना कि तंग !’
मैंने उसकी रेशम जैसी मुलायम जाँघों पर हाथ फिराया और मस्त होकर पूछा- बता मेरी अब इस लंड की दीवानी को क्या चाहिये… किस स्टाइल की चुदाई करवाना का दिल है इस हरामज़ादी मनोरमा का?
बड़े शरमाते हुए मनोरमा मेरे कान में बोली- निलेश… यार गांड में तेरा लंड महसूस करना है… चूत में कर लिया… मुँह में कर लिया… बेचारी गांड को छोड़ दूँगी तो गांड खफा नहीं हो जायगी… बता तू ही बता….खफा होगी या नहीं?
मैंने हंसते हुए कहा- हराम की ज़नी, सीधे सीधे नहीं कहेगी की निलेश मेरी गांड मार ले… बहन चोद यह कहेगी कि लंड को गांड में महसूस करना है… रुक ज़रा अभी कराता हूँ तुझे सब महसूस… साली रंडी की गंडमरी औलाद…
मनोरमा खुश होकर बोली- निलेश… तू कितनी मस्त मस्त गाली देता है साले… एक बात बता.. नेहा से पहले जितनी कहानियाँ छपी थीं उनमें तो कोई गाली नहीं थी, ऐसा क्यों?

मैंने कहा- सुन मां की लौड़ी, वो इसलिये मनोरमा कि नेहा मेरी पहली गर्ल फ्रेंड थी जो गाली देने और गाली खाने में बड़ी खुश होती थी… उसे चोदने से पहले कई दिन चैटिंग में जो गालियाँ उसने दीं और मैंने दीं उसमें मुझे इतना मजा आया कि मेरा अब बहुत दिल करता है लड़की से गाली सुनने को और उसे गाली देने को.. बस इतनी सी बात है… अब जल्द बता कि तेरी गांड मारूं या यूं ही मज़ाक कर रही थी हरामज़ादी?

मनोरमा नक़ली गुस्से से डांट के बोली- कहा तो था कि मार मेरी गांड…अब क्या बहन के लौड़े को INVITATION CARD छपवा के डाक से भेजूँ?
मैंने कहा- ले मादर चोद, रांड पहले लंड चाट चाट के अच्छे से गीला कर दे नहीं तो घुसेगा ही नहीं गांड में… पहले मरवाई है कभी गांड?
मनोरमा ने कहा- नहीं आज पहली बार होगा…
और फिर उसने गीली जीभ से लंड को खूब तर कर दिया।
मैंने उसे कहा कि घुटनों और कोहनियों के बल कुतिया की तरह हो जाये और चूतड़ ऊपर को उठा ले।
जब वो सही पोज़िशन में आ गई तो मैंने एक बार फिर उसकी गांड के छेद को चाट चाट के तर कर दिया, फिर लंड को छेद पर जमाया और मनोरमा की कमर पकड़ कर एक हल्का सा धक्का मारा तो लंड का सुपारा गांड में घुस गया।
‘हाय हाय थोड़ा दर्द हो रहा है… ज़रा धीरे धीरे घुसाना निलेश…’
मैं तो जानता था कि गांड मे रस तो होता नहीं इसलिये बहुत धीरे धीरे ही लंड घुसाना होता है।
हौले से धक्का लगाया तो लंड करीब दो इंच और भीतर चला गया, मैंने पूछा- क्यों मनोरमा … बहन चोद, आ रहा है मज़ा… दर्द तो नहीं है ना अब?
मनोरमा – खूब मजा आ रहा है… दर्द है लेकिन मीठा मीठा… बहुत अच्छा लग रहा है… निलेश पूरा घुसा ना !
मैंने एक गहरी सांस ली और फिर एक हौले से धक्का दे के लंड आधा गाण्ड में दे दिया।
मनोरमा का मुँह तकिये में घुस गया था धक्के के कारण और वो हैं…हैं….हैं की आवाज़ हर धक्के पर निकाल रही थी।
जब लौड़ा पूरा जड़ तक अंदर गड़ गया तो मैंने पूछा- मनोरमा मनोरमा मनोरमा अब कैसा लग रहा है…पूरा लंड अंदर है अब तेरी मस्त गाण्ड के ! आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मनोरमा- हाय सच में बड़ा मज़ा आ रहा है… तू निलेश बार बार मेरा नाम बोलता है तो मेरे दिल में कुछ कुछ होने लगता है…

मत बुलाया कर इतनी बार मेरा नाम… अब बस तुनके मार मार के मुझे आराम से इस मूसलचंद को गाण्ड में महसूस करने दे…
मैंने कहा- यार क्या करूं, तेरा नाम हज़ार बार लेने का दिल हो जाता है… तो क्या करूं… ना लिया करूं तेरा नाम… ले अब दस तुनके मारता हूँ…. मनोरमा मनोरमा मनोरमा मनोरमा …. ले ले ले… मनोरमा मनोरमा मनोरमा मनोरमा …
मनोरमा तड़प के बोली- तू कमीने आज मेरी जान लेकर ही मानेगा… इतनी बार बुलायेगा तो मेरा दिल धड़कना बंद कर देगा तभी दुष्ट तुझे तसल्ली होगी… तू पुकारता है तो मेरे दिल में पता नहीं क्या हो जाता है… दिल डूबने को होता है… और हाँ यूं ही तुनके लगाये जा। मज़े के मारे तेरी बिल्लो मस्त हो रही है।
मैंने कहा- मनोरमा , अब मैं अपना पूरा वज़न तेरे ऊपर डालूंगा… ज़रा अच्छे से कोहनियाँ टिका ले नहीं तो ढह जायेगी बिस्तर पर।
मैं मनोरमा की कमर पर टिक गया और अपने हाथ उसकी कमर के आज़ू बाज़ू से लेजाकर एक एक चूचा कस के पकड़ लिया।

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