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गुलाब जामुन से रसीली उसकी चुत-2

दोस्तों नमस्कार आज फिर से मै लौट आया हूँ अपनी कहानी को आगे बढ़ाते हुए मेरे जिन भाई बहनों ने इस कहानी का पहला भाग नही पढ़ा वो ऊपर दिए लिंक पर क्लिक करे पढ़ सकते है | तो दोस्तों अब गताग से आगे की कहानी …  मनोरमा ने प्यार से मेरे बालों को अपनी हसीन उंगली से उलझाते हुए कहा- कुछ तोहफा भी लाया है या सूखा सूखा HAPPY BIRTHDAY?

मैंने तकिये के नीचे से एक थैली निकाली जिसमें मैं मनोरमा के लिये सोने की पायज़ेब का एक जोड़ा बनवा के लाया था।

मैंने कहा- मेरी जानम, तेरे हसीन पैरों में पहनाने के लिये ये पायज़ेब लाया था… उनकी खूबसूरती के सामने तो ये बिल्कुल मिट्टी के समान है लेकिन बस दिल चाहा कि के पैरों में इनको पहनाऊँ… देख ना ज़रा तुझे ठीक लगे तो पहनाऊँ नहीं तो बदल कर के कुछ और ले आऊँगा। सच में , तेरी सुंदरता के समक्ष ये बहुत ही छोटा है… मुझे बड़ी शर्म आ रही है सच में तुझे ये देते हुए !

मैंने वापिस थैली को तकिये के नीचे रखना चाहा। मनोरमा ने मेरे हाथ से थैली छीन के पायज़ेब बाहर निकाली, चूमा और फिर एक प्यार भरा फूल सा चांटा या कह लो एक थपकी को मेरे गाल पर लगाया।

मनोरमा ने कहा- निलेश…यार तू हमें इतना ओछा समझता है कि तू इतने प्यार से तोहफा लाया तो हम उसे छोटा समझेंगे.. इसे तो हम कभी अपने से अलग न करेंगे… चल अब चुपचाप खुद ही पहना दे हमारे पैरों में !

मैंने कहा- तुम बहुत अच्छी हो मनोरमा … मैं तुम्हारे लिये नहीं सोच रहा था कि तुम इसे छोटा समझोगी, मैं खुद इसे तेरी खूबसूरती के सामने बहुत तुच्छ मान रहा था…Thank you मनोरमा मेरी भेंट स्वीकार करने के लिये…
मैंने पायज़ेब मनोरमा के पैरों में एक एक करके पहना दी।

पहनने के बाद देखा तो उसके पहले से ही सुन्दर पैर अब सैकड़ों गुना ज़्यादा सुन्दर ही नहीं बल्कि सेक्सी भी लग रहे थे।

मनोरमा ने मुझे गले से लगा लिया और बोली- क्या सच में मेरे पैर इतने सुन्दर हैं? तू हमें बना तो नहीं रहा है?
मैं बोला- मनोरमा , जितना मैं कह सकता हूँ उससे कहीं ज़्यादा पैर ही नहीं तेरे बदन का एक एक अंग उससे ज़्यादा सुन्दर है। मैं लगाऊँ दुबारा से वही गाना ताकि तुझे याद आ जाये कि मैं तुझे क्या समझता हूँ?
मनोरमा खुश होकर बोली- यार निलेश, अपनी बात कहने के लिये गाना सुनाने का आइडिया बहुत पसंद आया। क्या तू सब लड़कियों को यही गाना बजा के पटाता है? आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

मैं- नहीं , यह तो मैंने तुझ से मिलने से कुछ दिन पहले ही सीखा है। एक लड़की है अंजू । उसने नीलम की कहानी पढ़ के मुझे लिखा था कि वो भी नीलम जैसे जॉब के बदले में मुझ से चुदवाना चाहती है। मैंने उसके लिये एक नौकरी का इंतज़ाम कर दिया तो वो आई थी मेरे पास, उसने कहा कि वो मुझे रिझाने के लिये बिल्कुल नंगी होकर डांस करना चाहती है। मैं बोला ठीक है कर डांस। तो उसने अपने मोबाइल पर एक गाना बजाया और उस पर वो खूब नाची।
मनोरमा ने पूछा- पूरी नंगी नाची?

मैं- हाँ, पूरी नंगी तो नहीं सिर्फ पैरों में हाई हील के सैंडल उसने नहीं उतारे, बोली कि नंगे पैर नाचूंगी तो पैर गंदे हो जाएंगे। फिर मैं जब पैर चाटुंगा तो मुझे मज़ा नहीं आएगा।

मनोरमा – कौन सा गाना बजाया?’

मैं- दो गाने थे जिनमें उसने एक चुनने को कहा। यह भी कहा कि मर्द की चुदास बुरी तरह भड़काने के लिये इन दो गानों पर नंगी डांस करती लड़की से बेहतर कुछ नहीं है। एक गाना था ‘अंग से अंग लगा ले सांसों में है तूफान, जलने लगी है काया जलने लगी है जान’ और दूसरा था ‘हुस्न के लाखों रंग कौन सा रंग देखोगे, आग है ये बदन कौनसा अंग देखोगे’ दोनों गाने बहुत पुराने हैं पता नहीं तुमने कभी सुने या नहीं। मैंने दूसरा वाला चुना… मैं मान गया कि इस गाने पर नंगा डांस ठरक हद से ज़्यादा बढ़ा देता है।

मनोरमा ने कहा- गाने सुने हैं.. कभी कभी रेडियो FM पर बजते हैं… अबकी बार ध्यान से सुनूंगी और कल्पना करूँगी कि गाना बज रहा है और एक लड़की पूरी नंगी होकर गाने की धुन पर डांस कर रही है… निलेश तुमने अंजू की कहानी नहीं लिखी?

मैं- लिख रहा था लेकिन पूरी नहीं कर पाया, कर दूंगा कुछ दिनों में !
मनोरमा ने कहा- तू साले बहुत दुष्ट है…हम गुस्से हैं निलेश से !
मैंने उसका मुँह चूमना चाहा लेकिन मनोरमा परे हट गई।
मैंने पूछा- क्या हुआ मनोरमा ? क्यूं हमारी जी खफा हैं हमसे?
‘तूने हमारे साथ भेदभाव किया है। इसलिये हम बहुत नाराज़ हैं निलेश से…’
मनोरमा मेरी तरफ पीठ कर के लेट गई।

मैंने हक्का बक्का सा हो गया, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैंने ऐसा क्या भेदभाव कर दिया कि मनोरमा गुस्से हो गई।

अभी तो मस्त थी, अंजू के बारे में सुन रही थी लेकिन यह अचानक पलटी क्यों?
मैंने मनोरमा की पीठ पर जीभ फिराई, मनोरमा कसमसाई और बोली- बस तू दूर रह हमसे…हाँ हम नहीं बोलते तेरे से… मैंने फिर जीभ फिराई और पूछा- जान मनोरमा , बता दे क्या भेदभाव किया तेरे इस गुलाम ने?

मनोरमा ने कहा- तूने नेहा का स्वर्ण रस पिया था उससे मिलते ही। हमें तूने चोद भी दिया लेकिन स्वर्ण रस अभी तक नहीं पूछा। यह भेद भाव नहीं तो क्या है। नेहा को तूने इतना चाटा, हमें अभी तक चाटा क्या? यह नहीं है क्या भेद भाव? जाओ हम नहीं बात करेंगे।

मैंने मनोरमा की एक लम्बी चुम्मी ली, इस बार उसने मुँह नहीं हटाया। मैंने उसके चूचे भी ज़ोर से मसले और कहा- यार कोई भेद भाव की बात नहीं है। मिलने के बाद हमारी बातें किसी और दिशा में चल पड़ीं इसलिये ना तो स्वर्ण रस पीने का मौका मिला और ना ही मेरी को चाटने का। अभी पिलाओ ना .. देर किस बात की है.. अभी भेद भाव दूर लिये देता हूँ… पहले रस पिलाओ, फिर मैं चाटूँगा। आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

मनोरमा ने हंस कर कहा- निलेश, हम कौन सा सचमुच खफा हुए थे। हम तो अपने निलेश को सता रहे थे। बहुत मज़ा आया तेरे को घबराते हुए देख के, चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं…
मैंने कहा- चलो अब पिला दो स्वर्ण रस जल्दी से।

मनोरमा ने कहा- तूने नेहा का स्वर्ण रस पिया था उससे मिलते ही। हमें तूने चोद भी दिया लेकिन स्वर्ण रस अभी तक नहीं पूछा। यह भेद भाव नहीं तो क्या है। नेहा को तूने इतना चाटा, हमें अभी तक चाटा क्या? यह नहीं है क्या भेद भाव? जाओ हम नहीं बात करेंगे।

मैंने मनोरमा की एक लम्बी चुम्मी ली, इस बार उसने मुँह नहीं हटाया। मैंने उसके चूचे भी ज़ोर से मसले और कहा- यार कोई भेद भाव की बात नहीं है। मिलने के बाद हमारी बातें किसी और दिशा में चल पड़ीं इसलिये ना तो स्वर्ण रस पीने का मौका मिला और ना ही मेरी को चाटने का। अभी पिलाओ ना .. देर किस बात की है.. अभी भेद भाव दूर लिये देता हूँ… पहले रस पिलाओ, फिर मैं चाटूँगा।

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