चुदाई की कहानी पढ़कर फैन बन गई-2

दोस्तों इस कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा की मैंने प्रतिभा ने लंड के मुँह पर उभरी हुई एक बूंद को चाट लिया और खाल पीछे करके सुपारा नंगा करके मुँह में ले लिया। प्रतिभा के मुँह से मस्ती के मारे सुपारी ही बाहर निकल पड़ी और एक गहरी आह उसके मुँह से उभरी।

मैंने जीभ को और गीला किया और उसे गाण्ड के छेद में घुसा दिया। अब तो प्रतिभा ने एक किलकारी मारी। उसे उत्तेजना में यह भी ध्यान न रहा कि इतनी ऊँची आवाज़ में किलकारी होटल में सुनी जा सकती है, बड़ी तेज़ी से उसने अपने गोरे बेहद खूबसूरत चूतड़ हिलाये तो मैंने जीभ और अंदर घुसा दी।

फिर मैंने अपने दोनों अंगूठे प्रतिभा की चूत में घुसा दिये और ऊपर को भग्नासा को हौले से दबाया तो लंड चूसना भूल के प्रतिभा धड़ाम से झड़ी, मेरे अंगूठे चूत के रस में सराबोर हो गये तो मैंने अपनी जीभ गाण्ड से निकाल कर चूत में घुसा दी और खूब अच्छे से भीतर घुमाई। आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | प्रतिभा मज़े में फिर से झड़ी और मेरा मुँह रस से भर गया।

माशा अल्लाह !!! चूतामृत से मेरी तो आत्मा तक तर गई।

प्रतिभा अब धकाधक अपनी चूत मेरे मुँह से मसले जा रही थी। उसने दुबारा से लंड का टोपा चूसना शुरू कर दिया था। वो झड़े जा रही थी और सुपारी चूसे जा रही थी।
फिर वो शांत हो कर मेरे ऊपर पड़ गई और लेटे लेटे लंड को चूसती रही, जब सारा रस खत्म हो गया तो मैंने दुबारा जीभ उसकी गाण्ड में घुसा दी।

गाण्ड चूसवाने का ज़बरदस्त आनन्द उसकी सहनशक्ति से आगे निकल गया, हाय हाय हाय… करती हुई प्रतिभा ने बड़े ज़ोरों से लंड को मुँह में आगे पीछे आहे पीछे करना आरंभ कर दिया, कभी लंड को बाहर करती और ‘हाय मेरी मां, हाय मैं मर गई’ कहती और फिर लंड को पूरा गले तक घुसा लेती।
जितनी जीभ गाण्ड में जा सकती थी उतनी घुसा कर मैं उसकी जीभ से ही गाण्ड मार रहा था।
मैं भी अब झड़ने वाला हो चुका था, एक सुरसुरी बड़ी तेज़ी से मेरी रीढ़ की हड्डी में इधरा उधर आ जा रही थी और मेरे अंडों में दबाब इतना बढ़ गया था कि बस फटने को ही थे। आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |  प्रतिभा दनादन लंड को चूसे जा रही थी।

अचानक मेरे गोलों में एक पटाखा सा फूटा और मैं झड़ गया, लावा फूट फूट के प्रतिभा के मुँह में गिरता चला गया।
तभी प्रतिभा भी एक बार फिर से झड़ी और बड़े ज़ोरों से झड़ी। एक रस की फुहार मेरी ठुड्डी पर आई। मैंने तुरंत जीभ गाण्ड से निकाली और मचल मचल के चूत से बहत हुआ रस पीता गया। हम काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे, फ़िर देखा तो प्रतिभा गहरी नींद में थी।

ऐसा होता है, जब लड़की कई बार झड़ती है तो उसे अक्सर नींद आ जाती है।

मैं सोई हुई उस परी को निहारने लगा। सिर से पैरों तक उसके हर एक अंग तो अच्छे से अपनी आँखों में बसा लिया। लड़की थी या क्या क़यामत थी, झरने की तरह कंधों तक लहराते हुए रेशमी बाल, बड़ी बड़ी मर्दों को लुभाने वाली चूचियाँ, उन पर सीधी खड़ी हुई काले रंग की निप्पल, निप्पालों का अच्छा बड़ा दायरा !!!

मेरा दिल करा कह दूँ ‘प्रतिभा जब तू माँ बनेगी तो मैं तेरा दूध पियूँगा।’ अभी तक मैंने सिर्फ दो लड़कियों का ही दूध पिया है नेहा का और जूसी का, प्रतिभा तीसरी होगी।

सुन्दर चिकनी बाहें, उतने ही सुन्दर हाथ और पैर देख देख कर लंड गुर्राने लगा। उसके पैर और टखने बहुत ही अधिक सुन्दर, सुडौल थे, टांगें और जाँघें ऐसी कि आदमी मर मिटे।

उनको निहार कर तो साधु संत भी राम भजन भूल के बलात्कारी बन जाएँ। काश कि उसके पैरों में पायज़ेब भी होती !
मेरा दावा है पायज़ेब से उसके पैरों की खूबसूरती में चार चाँद लग जाते।

मैंने नोट कर लिया कि अगली बार जब मिलन होगा तो मैं एक खूबसूरत सी सोने कि पायज़ेब बनवा कर साथ लाऊँगा और चुपके से प्रतिभा के जब पैर चाटूँगा तो पहना दूंगा।

प्रतिभा एक पूरा पका हुआ फल थी जिसे फौरन ही चूस लेना बहुत ही ज़रूरी था। यदि यह कहा जाये कि इस फल को चूसने में देर करना स्त्री जाति के विरुद्ध अपराध है तो गलत ना होगा।

मैंने प्रतिभा के कान के पीछे अपनी जीभ गीली करके फिराई, प्रतिभा कसमसाई लेकिन जागी नहीं। मैंने उसके कान की लौ को चूसा और फिर जीभ कान के अंदर घुमाई। इस बार वो जग गई और ऊँ…ऊँ…ऊँ… करने लगी।

मैंने तुरंत ही उसका मुखड़ा हाथों में लेकर उसके रसीले होंठ चूसे, उसने भी खुश होकर चुम्*मे में मेरा पूरा साथ दिया।
मैंने उसकी चूचियाँ निचोड़नी शुरू कीं, पहले मैं हौले हौले निचोड़ रहा था, प्रतिभा ने आहें भरनी शुरू कर दीं, उसने अपनी टांगें मेरी टांगों से कस के लपेट दीं।

मैंने चूची अब थोड़ा ज़ोर से दबाईं। प्रतिभा को और मज़ा आया और वो सिसकारियाँ भरने लगी।
मैंने चूचियाँ निचोड़ते हुए प्रतिभा के पेट को चाटना आरंभ किया, पेट पर जीभ गीली कर मैं दाएं से बायें चाटता एक सिरे से दूसरे सिरे तक, उस सिरे पर पहुँच कर फिर चाटता हुआ वापस आता।

काल रही थी जैसे उसका गला भिंच गया हो।

मैं अब चूचियों को पूरी ताक़त से दबा रहा था, साथ साथ प्रतिभा के पेट को चाटते हुए अब मैं उसकी नाभि तक जा पहुँचा था। जीभ टाइट करके मैंने उसकी नाभि में घुसा दी और गोल गोल घुमाने लगा।

फिर क्या था मज़े से पागल होकर प्रतिभा ने टांगें छटपटानी शुरू कर दीं।

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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