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चुदाई की कहानी पढ़कर फैन बन गई-1

सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मुझे कुछ ही दिनों में एक गर्लफ्रेंड मिली जिसकी कहानी मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ।
हुआ यूं कि जो कहानी प्रकाशित हुई थी बहुत से पाठकों के मुझे इमेल आये प्रशंसा से भरे हुए। उनमें एक पाठिका है प्रतिभा चंदेल, उनका मेल आया आपकी चुदाई मस्त है नेहा की चुदाई भी मस्त है।;
मैंने उनको धन्यवाद लिख कर भेज दिया।

कुछ दिनों के बाद उनका मेल आया ‘, मेरी चूत कब मारोगे?’

मैंने लिखा ‘जब आप चाहो, बंदा हाज़िर है।’

प्रतिभा जी ने फिर कहा कि वो नेहा से बात करना चाहती हैं।

मैंने कहा कि यह तो मुमकिन नहीं है क्योंकि इस से नेहा की प्राइवेसी बिगड़ती है और मेरा फ़र्ज़ है कि मैं अपनी गर्ल फ्रेंड का राज़ राज़ ही रखूँ।

प्रतिभा जी ने कहा मैं यह मानती हूँ लेकिन अगर नेहा मान जाती है तो कोई परेशानी नहीं है, आप पूछ के तो देखो।
मैंने कहा- ठीक है। आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

मैंने तुरंत नेहा से सारा मामला बताया और आग्रह किया प्रतिभा जी से बात करने का।

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नेहा तो यारों आग बबूला हो गई, उसने फोन पर मुझे जम कर कोसा, बहुत से गालियाँ दीं, उसने गुर्राते हुए पूछा- तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरा असली नाम किसी अजनबी को बताने की। अगर यह बात फैल गई तो मेरा क्या होगा। मैं शादीशुदा दो दो बच्चों की माँ हूँ।
खैर बड़ी मुश्किल से नेहा का गुस्सा शांत किया। बहुत मिन्नत खुशामद की, तब जा के नेहा कुछ ठंडी हुई।
पूरे दो दिन लगे इस में। परंतु आखिरकार नेहा ने कहा वो फोन पर बात तो किसी भी हालत में नहीं करेगी लेकिन ईमेल पर चैटिंग कर लेगी।

मैंने नेहा की ईमेल आईडी प्रतिभा जी को दे दी और कहा- आप कर लीजिये चैटिंग।

दो दिन ना जाने क्या दोनों ने आपस में क्या बातचीत की, मैंने पूछा तो दोनों ने कुछ भी बताने से ना कर दी, परंतु नेहा और प्रतिभा जी की दोस्ती बहुत पक्की हो गई दो ही दिन में।

खैर आगे हुआ यह कि मैं प्रतिभा जी को प्रतिभा कहने लगा और वो मुझे निलेश कहने लगी। उसने मुझसे आपकी बजाये तू से बात करनी शुरू कर दी और मुझे मेरे नाम निलेश से पुकारने लगी।

मेरी और प्रतिभा की दो दिन खूब इमेल पर बातें हुई। मैंने खुल कर बताया कि मैं चुदाई में लड़की को कैसे कैसे मज़ा देता हूँ। प्रतिभा मेरी बातें पढ़कर बेहद गर्म हो जाती थी। मेरा भी लंड अकड़ जाता था।

दो दिन के बाद मैंने प्रतिभा को अपना नंबर दिया और यह तय हुआ कि वो मुझे शाम को एक मिस कॉल मारेगी और मैं जब भी मौका पाऊँगा उसे फोन कर लूंगा।

शाम को 7 बजे मैं एक घंटे के लिये सैर करने जाता हूँ। वही ऐसा टाइम है जब बिना किसी डर के बात कर सकता हूँ। मेरा काम ऐसा है मैं RESIDENCE CUM OFFICE में होता है तो मेरी बीवी जूसी घर पर होती है इसलिये जब मैं घर पर हूँ, बात करना संभव नहीं है।

दो दिन हमने पूरा एक घंटा अच्छी तरह खुल के बातें कीं। प्रतिभा की मधुर बोली मेरे कानों में शहद की भांति लगती थी, यूँ लगता था घंटियाँ धीमी धीमी बज रही हैं। उसकी आवाज़ सुन कर ही मैं मतवाला हो जाता था।

प्रतिभा का कहना था कि हमारी चुदाई के भिन्*न भिन्*न वर्णन सुन सुन कर वो भी इतनी गर्म हो जाती है कि चूत बेतहाशा रस बहाने लगती है, चूचुक कस जाते हैं और निप्पल यूँ अकड़ जाते हैं जैसे किसी मर्द का लौड़ा अकड़ जाता है।

तीसरे दिन मैंने कहा- प्रतिभा … यह कंप्यूटर पर बैठ कर बहुत वक़्त बीत गया… अब तुम्हारी तसल्ली हो गई हो यो यार, मिलने का प्रोग्राम बनाते हैं… तुम भी गर्म, मैं भी गर्म होकर दुख पा रहे हैं… अब मिल कर मिलन करें।

प्रतिभा ने कहा- हाँ निलेश, मैं भी सोच रही थी कि अब मिलने का समय आ गया है। लेकिन कहाँ और कैसे मिलेंगे?
मैं बोला- देखो ऐसा करते हैं, नई देहली स्टेशन के पास एक होटल है जिंजर, वो सुरक्षित है, वहाँ मैं दो कमरे बुक करवा देता हूँ।

प्रतिभा ने पूछा- क्या यह 5 स्टार होटल है? और दो रूम क्यों?

मैंने कहा- , 5 स्टार नहीं है। 3 स्टार है। 5 स्टार होटलों में मुझे बहुत से लोग जानते हैं। जिंजर स्टेशन के साथ लगा हुआ है वहाँ बहुत से लोग सिर्फ दिन के लिये रूम लेते हैं, 5 स्टार में ऐसा करना शक पैदा करता है। दो रूम इसलिये कि कभी भी रेकॉर्ड से तुम्हारा और मेरा कोई लिंक नहीं बैठना चाहिये। एक ही रूम लेंगे तो रेकॉर्ड में दोनों के नाम आ जायेंगे एक रूम में। दो रूम दो रेकॉर्ड कोई प्राब्लम नहीं, कोई आपस में लिंक नहीं।

प्रतिभा बोली- हाँ ठीक है… समझ गई… करवा लो बुक। लेकिन एक बात है…सबसे पहले तुझे मेरी सू सू पीनी पड़ेगी।
मैं बोला- हाँ हाँ , बड़ी खुशी से पी लूंगा !

और फिर मैंने चार दिन बाद की तारीख पर दो रूम बुक करवा लिये। हमने तय किया था कि मैं पहले दिन में 11 बजे होटल में चेक इन करूंगा और प्रतिभा दो घंटे के बाद 1 बजे के करीब।

मेरा रूम नंबर 304 था और प्रतिभा का 306, प्रतिभा सवा एक बजे आ गई और मुझे फोन कर दिया कि पहुँच गई है।
तुरंत ही मैं उसके रूम पर चला गया।

प्रतिभा ने दरवाज़ा खोला, उस वक़्त हम पहली बार एक दूसरे को देख रहे थे। दो मिनट तक हम बस आँखों में आँखें मिलाये एक दूसरे को निहारते रहे। आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है |

मैं बोला- प्रतिभा ?

वो बोली- निलेश?

और हम लिपट गये।

मैंने पूछा- , तुम्हें मेरी सफेद दाढ़ी देख कर निराशा तो नहीं हुई?

प्रतिभा ने कहा- नहीं निलेश…नेहा की कहानी पढ़ कर इतना तो समझ आ गया था कि निलेश कोई 25 साल का तो होगा नहीं। वो कहानी ही बहुत साल पहले की है… मुझे तो चाहिये था एक बहुत तजुर्बेकार आदमी… जो मुझे पूरा मज़ा दे सके।

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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