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मजेदार चुदाई का आनंद-2

हेल्लो मित्रो आज अपनी कहानी दोनों मिल कर अनु को छोड़ेगे भाग १ को आगे बढ़ाते हुए लिख रहा हूँ दोस्तों अभी तक अपने पढ़ा नेहा बार बार मुझे मुँह पर चूमे जा रही थी और राजा राजा कहे जा रही थी।

वो मेरे प्यार में पहले से ही दीवानी थी और इतनी मस्त, मज़ेदार चुदाई का आनंद लूटकर और भी दीवानी हो चली थी। और अब आगे …  हम काफी देर तक यूं ही पड़े रहे और एक दूसरे के पसीने में लथपथ बदन से लिपटे रहे।  यूं ही चिपके चिपके पड़े रहने में भी बड़ा मज़ा आ रहा था।

मैंने पूछा- क्यों नेहा … तेरी बलात्कार का ड्रामा खेलने की मर्ज़ी हो गई पूरी और साथ साथ में आदि मानव की चुदाई की भी? आया मज़ा मेरी जान को?

नेहा इतरा के बोली- मज़ा तो ख़ूब आया राजा, लेकिन बहन के लौड़े तूने कितना ज़ोरों से कुचला है मेरे मम्*मों को… हरामी ने मलीदा बना के रख दिया मेरे बदन का… लेकिन बहनचोद अभी तेरा गेम पूरा नहीं हुआ है..अभी तो राजा तुझे मेरे मुताबिक़ चुदना है… हो जा तैयार साले, आज तेरी मां चोदती हूँ… ना तेरी गाण्ड फाड़ दी तो कहना!

मैं बोला- तूने ही तो कहा था कि तुझे मेरे से रेप करवाना है… मैंने तुझे बताया था ना रेप में तेरे शरीर की ख़ूब कुटाई होगी… बताया था या नहीं?

अभी तो शुक्र कर कि मैंने तुझे आदि मानव की तरह नहीं चोदा नहीं तो तेरा हाल खस्ता हो चुका होता… अब तू कर जो तुझे करना है… फाड़ दे बहन चोद मेरी गाण्ड… जिसमें मेरी नेहा खुश, उसी में मैं भी खुश!

‘हाँ निलेश तूने सब बताया था… मगर मुझे मज़ा भी तो बेहिसाब आया रेप करवाने में… कुटाई करवाने में… राजा तू सच में बहुत बड़ा हरामी है… अब देख साले जो मैं बताती हूँ, वही करे जा चुपचाप…’
इतना कह कर नेहा ने मेरा एक गहरा और ख़ूब गीला चुम्बन लिया और लगी अपने पर्स को खंगालने।

उसने पर्स में से दो रस्सियाँ निकालीं। रस्सियाँ सूती थीं और करीब आधा इंच मोटी थीं और करीब आठ फुट लम्बी थीं। उसने मुझे से बेड पर बिछा हुआ गद्दा सिर की तरफ से उठाने को कहा।

जब मैंने गद्दा उठा दिया तो उसने एक रस्सी गद्दे के नीचे डाल के उसके सिरे बेड के आर पार निकल दिये।
फिर उसने रस्सी की सिरे आगे पीछे किये ताकि दोनों साइड में रस्सी के सिरे बराबर की लंबाई के बाहर निकले रहें।

फिर नेहा ने मुझे गद्दे का पैरों की तरफ वाला हिस्सा उठाने को कहा। मैंने उठाया तो उसने पहले की तरह दूसरी रस्सी को बेड के आर पार डाल के दोनों सिरे बराबर लंबाई के सेट कर दिये।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करना चाहती है।

अब उसने मुझे बिस्तर पर लेट जाने को कहा।

मैं लेट गया और उसने रस्सी के एक छोर से मेरा दायां हाथ कस के बांध दिया और उसी रस्सी के दूसरे छोर से मेरा बायाँ हाथ बांध दिया।

नेहा अच्छे से होम वर्क करके आई थी, उसने पूरा हिसाब लगा कर ही ऐसी लंबाई की रस्सी ली थी जिससे मेरे दोनों बाज़ू पूरे फैलाकर हाथ बांधे जा सकें।

मेरी कलाइयाँ बांधने के बाद नेहा ने उसी प्रकार दूसरी रस्सी के एक एक सिरे से मेरी टांगें फैला कर टखनों से कस के बांध दिये।

अब मैं चारों खाने चित्त बेड पर पड़ा हुआ था, न मैं अपने हाथ हिला सकता था और न टांगें।
एक बाज़ू हिलाता तो उसी रस्सी के दूसरे छोर पर बंधा हुआ मेरा दूसरा बाज़ू खिंचता और कोई सी भी टांग हिलाने की कोशिश करता तो दूसरी टांग खिंचती।

इस प्रकार नेहा ने मुझे बिल्कुल जाम कर दिया था बेड पर, और अब कोई भी मेरे साथ कुछ भी कर सकता था।
मैं एकदम निस्सहाय पड़ा हुआ था और बड़े कौतूहल से आगे होने वाली घटना का इंतज़ार कर रहा था।

आज कुछ बिल्कुल नया होने वाला था। न जाने क्या खुराफात नेहा की खोपड़ी में आज घुसी हुई थी। यह हरामी लड़की इतनी ज़बरदस्त चुदक्कड़ निकलेगी, यह मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था। कौन कह सकता था कि इसकी चूत की सील कुछ ही दिन पहले फाड़ी गई थी।

ऐसा लगता था, न जाने कितने सालों से यह चुदाई के भांति भांति के खेल खेलती आ रही है।
नेहा चढ़ के मेरी छाती पर बैठ गई और अपने हसीन मम्*मों के नीचे हाथ रख कर लगी ऊपर नीचे हिलाने।

क्या मस्त उछल कूद कर रहे थे नेहा के बड़े बड़े चूचे।
उसकी चूचियाँ मचल मचल कर मुझे तड़पाये जा रही थीं, लण्ड अकड़ चुका था और एक गुस्साये नाग की तरह फुंकारें मार रहा था। नेहा हिलाते हिलाते चूचियों को बिल्कुल मेरे मुँह के सामने ले आई।

मैंने हुमक कर एक चूचा मुँह में ले लिया और लगा ज़ोर ज़ोर से चूसने। खूब मस्ती में आकर मैंने दो तीन बार चूची को काट भी लिया। नेहा बस कुछ ही देर मेरे मुँह में एक चूची रहने देती और फिर दूसरी चूची दे देती।

कुछ देर तक यह खेल करने के बाद नेहा ने यकायक मेरा मुँह अपनी चूचियों के बीच में कस के फंसा दिया। उसकी चूचियों के बीच की जगह में मेरा मुँह और नाक थे और चूचे मेरे गालों पर।

नेहा ने अब मम्मों से मुझे मुँह पर खूब रगड़ा। साथ साथ वो ऊँची अवाज़ में कहे जा रही थी- ले बहन चोद कुत्ते, ले मेरे मम्मे सूंघ… जीभ बाहर ले भोसड़ी के… सूंघता जा और चाटे जा बहन के लौड़े… ले ले ले… कमीने!

मैंने जीभ निकाल ली, उसके मस्त चूचे सूंघे गया और चाटे गया। बड़ा लुत्फ आ रहा था नेहा के इस नये स्टाइल में।
फिर नेहा ने अपने मम्मे मेरे मुँह से ज़रा सा दूर कर के मुझे कहा कि मैं अब उनको चाट चाट के मज़ा लूँ।

मम्मे इतनी दूर थे कि मैं अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल कर ही चाट सकता था। उत्तेजना में बिलबिला कर मैंने एक भूखे पिल्ले जैसे जीभ निकाली और उन मदमस्त मम्*मों को चाटना शुरू किया।

मेरे खुद के तो हाथ और पैर बांधे हुए थे इसलिये जैसा नेहा चाहती उसी चूचे या उसकी निप्पल को मैं चाट पाता। इस खेल में मुझे भी अंधाधुंध मज़ा आ रहा था।

मैं भी नेहा क़ी तरह किलकारियाँ मार मार के उसके नर्म गर्म चूचे चाट रहा था। जब नेहा बहुत गर्मा गई तो उसने मेरी तरफ अपनी पीठ कर ली और अपनी चूतड़ मेरे मुँह के पास लाकर लण्ड को गप्प से मुँह में ले लिया और लगी चूसने जैसे कि आम चूस रही हो।

उसने लण्ड क़ी जड़ को कस के पकड़ लिया था और वो तेज़ तेज़ अपना मुँह ऊपर नीचे कर के मुझे मुँह से चोदने लगी।
इधर मैंने उसकी चूत पर जीभ लगा के घुमानी शुरू कर दी।

नेहा आनन्द उठाते हुए कभी अपने चूतड मेरे मुँह से रगड़ती और कभी अपनी रसाती हुई बुर को मेरे मुँह से सटा कर मुझे उसे चूसने का मौका देती। कभी वो अपनी झांट का जंगल में मेरा मुँह मसलती।

बेतहाशा मज़े के कारण उसकी चूत अब दनादन रस छोड़ रही थी। हम दोनों चुदास क़ी उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गये थे, अब लगता था कि बस लुढ़क ही जायेंगे।

नेहा को शायद अहसास हो गया था कि मैं अब ज़्यादह देर तक सबर नहीं कर पाऊँगा।

उसने जल्दी से अपने को मुझ से अलग किया और घुटनों के बल मेरे लण्ड के इधर उधर सेट हो गई जिससे उसकी रस से सराबोर चूत लण्ड के एकदम ऊपर आ गई थी।

उसने एक हाथ से चूत के होंठों को फैलाया और दूसरे हाथ से लण्ड को पकड़ कर टोपा चूत के होंठों से लगा दिया।

चूतरस से लौड़े का टोपा पूरा तर हो गया और जैसे ही नेहा ने खुद को नीचे करना शुरू किया लण्ड बड़े आराम से फिसलता हुआ चूत में पूरा घुस गया।

नेहा नीचे होती चली गई जब तक कि लौड़ा समूचा उसकी प्यारी सी चूत में घुसकर उसकी बच्चेदानी के मुँह से टकरा नहीं गया।
नेहा ने अपने आप को इधर उधर सरका के ढंग से सेट किया और मेरे ऊपर लेट गई।
मैंने कहा- जी, अब क्या करने का प्लान है आपका?

लण्ड को बेहिसाब मज़ा दिया

नेहा ने दो तीन बार चूत को लपलपा के लण्ड को बेहिसाब मज़ा दिया और इतरा के बोली- चूतिए… कुछ नहीं, बस अब मैं गीता का पाठ करूँगी… कमीने कुत्ते, अब तुझे चोदूंगी नहीं तो और क्या करूँगी… अपनी माँ चुदवाऊँगी क्या? लगता है तेरा लौड़ा क्या झड़ा, तेरी अकल भी तेरे अंडों में घुस गई है। इतना कह कर नेहा ने मेरे होंठ अपने मदमस्त होंठों में दबा लिये और लगी चूसने। साथ साथ वो हौले हौले धक्के भी मारने लगी।

जैसे पहले नेहा के नक़ली रेप के टाइम मैंने उसे बिल्कुल बेबस कर रखा था, उसी प्रकार अब मैं भी एकदम निस्सहाय सा पड़ा हुआ था अपने हाथ पैर बंधवा के। नेहा बड़ा स्वाद ले लेकर, चटखारे मार मार कर मुझे चोद रही थी।
थोड़ी देर मेरे होंठ चूसने के बाद उसने कहा- चल मेरे पिल्ले अब मेरे मम्मे चूस… अच्छे से चूसियो मादरचोद… चूचा मुँह में ले और जीभ निप्पल पर फिरा!

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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