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ग्रुप में चुदाई की हिंदी सेक्स स्टोरी

मैं अरुणा,30 वर्षीया शादीशुदा औरत हूँ, और घर में मेरी एक 4 साल की बेटी साक्षी, 58 साल के ससुर ज्ञानचन्द, मीना मेरी 53 साल की सास, 27 साल की तलाक़शुदा ननद, रूपा है. मेरा पति दुबई में काम करता है और तीन साल के
बाद छुट्टी पर आता है वो भी एक महीने की.

मेरे पति का नाम चितरंजन है.. मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी है, मेरे बूब्स 36 इंच, हिप्स 36 इंच और कमर 30 इंच हैं, रंग गोरा. मेरे चूतर बड़े ही मस्त हैं और मेरे अंदर सेक्स की भूख ज़यादा ही है. लोग कहते हैं कि मैं अपनी मा की तरह चुदकद हूँ. मेरी मा देवान्ति देवी आज भी अपनी चूत में लंड लेने से नहीं हिचकिचाती जबकि उस की उमर 50 साल की हो चुकी है.

जैसा के आप जानते ही हैं, पति दुबई में होने के कारण मुझे तस्सलिबक्श चुदाई नसीब नहीं हो पाती. मैं लंड को तरप्ति रहती हूँ, मेरी ननद रूपा का तलाक़ हो गया किओं कि उसका पति साला नमार्द था. भोसड़ी का मेरी रूपा
को दोष देता रहता था कि वो बांझ है जब कि वो रूपा को अच्छी तरह से चोद नहीं सकता था.

खैर हम दोनो भाबी ननद लंड की कमी के कारण एक दूसरे के साथ लेज़्बीयन संबंध बना चुकी थी. रूपा को मेरी चूत का नशा सा था.. वो जब भी मौका मिलता, मेरे कमरे में आ कर मेरी चुचि चूसने लगती, कभी चूत में उंगली करती और कभी अपनी मादक चूत को मेरे हवाले कर देती.

रूपा का खिला हुआ यौवन, बड़ी बड़ी 38 इंच की चुचि, गांद भी कम से कम 38 की ही होगी. उसके चुत्तेर खूब मस्त थे. मैं अपने हाथ उसके चूतरो से दूर नहीं रख पाती. लेज़्बीयन संबंध तक तो ठीक है लेकिन जब मेरी ननद जोश में आ जाती तो उसकी कामवासना पर काबू पाना मुश्किल हो जाता और रूपा क़िस्सी भी कीमत पर लंड पाने के लिए बेताब हो जाती.

एक दिन उसने मुझे पुच्छा कि मेरा पति (यानी की उसका भाई) कैसी चुदाई करता है और उसका लंड कितना बड़ा है. मैने उससे बताया के उसके भैया का लंड 9 इंच का है और ग़ज़ब का कड़क है. जब वो चोद्ता है तो चूत को तारे नज़र आने लगते हैं.

“साला एस्से पेलता है के चूत की भोसड़ी बना देगा, ऐसी चूत चूस्ता है के सारा पानी निकाल देता है, वो कहता है के अगर उसे कामवासना का बुखार चढ़ा हो तो अपनी मा या बेहन को भी चोद डाले, लेकिन मेरी बन्नो मेरी किस्मत ही ऐसी है के वो तीन साल में एक महीने के लिए ही मुझे चोद सकता है और मेरी चुदास चूत को लंड रोज़ चाहिए, रूपा, साली तू ही कोई प्लान बना ता कि हम दोनो ही रोज़ लंड के मज़े ले सकें,” मैं बोली.

रूपा ने कहा’ भाबी, तुझे तो तीन साल में एक महीने तो लंड मिल जाता है, मुझे तो अभी तक चुदाई का असली मज़ा नहीं आया, मेरे उस नमार्द पति का तो खड़ा ही नहीं हुआ, बेह्न्चोद चूत पर रगड़ता था और झाड़ जाता था और मेरी चूत तड़प तड़प कर आग में जलती रहती, भाबी मैं क्या प्लान करूँ.

मै बोली यह तो तुम्हें ही कोई प्रबंध करना पड़ेगा, मेरी चूत को भी शांत करवा दो, अगर तेरा कोई यार है या कोई कज़िन है तो उस से ही चुदवा दो मुझे, देखो भाबी मेरी चूत कैसे ललाइत है लंड के बिना,’ मैने कहा चलो देखते हैं की क्या हो सकता है. आप ये कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

अगले दिन मैं बाज़ार जा रही थी तो मैने अपने ससुर से पुचछा” बाबू जी आपको क्या मंगवाना है बाज़ार से? जो चाहिए, मैं ला दूँगी, ‘ मेरे ससुर ने मुझे ध्यान से देखा और कहा ” बहू तुम शिलाजीत ले आना और साथ में छुआरे भी लेते आना,” मैने पुचछा” ठीक है लेकिन आपको क्या करनी है यह चीज़ें बाबू जी,’

बाबू जी बोले,” बेटी तेरा पति तो दुबई में बैठा है, लेकिन मुझे तो पति का काम करना पड़ता है ना, तेरी सासू को खुश करने के लिए यह चीज़ें चाहिए, इन से मर्दानगी बढ़ती है, ताक़त आती है बेटी,’ कहते हुए बाबूजी ने मुझे अजीब नज़रों से देखा, और मुझे लगा के वो मेरी चूचियो को घूर रहे हैं.

जब मैं बाज़ार जा रही थी तो मुझे बाबूजी की नज़रें मेरे चूतरो का पीछा करती हुई महसूस हुई. मेरे शरीर में एक सिरहन सी दौर गयी और मेरी चूत में पानी भर गया. मैं सारी चीज़ें लेकर आई और बाबूजी की चीज़ें उनको देने गयी. जब बाबू जी ने चीज़ें पकड़ी तो मेरे हाथों से उनका हाथ अचानक ही छ्छू गया, मेरा पैर फिसल गया और मेरे ससुर ने मुझे अपनी मज़बूत बाहों में लेकर संभाल लिया.

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