वो दिन कभी फिर आया ही नहीं

गतांग से आगे …..

मैं उसकी इस हरकत को समझ नही पाया..”इसे क्या हुआ..ये हमे देखकर भाग क्यू गयी.”उस लड़की ने मुझसे सवाल पुछा ‘मुझे क्या मालूम…लेकिन इसने गेट को ऐसे बंद किया है कि अब दुबारा तो खोलेगी नही..चलो कार मे वापस चलते है,…”इतना कहकर मैने उस लड़की को वापस उठा लिया और कार की तरफ बढ़ने लगा.

ये सिचुयेशन मेरी लिए बेहतर थी..मैने मौके का फ़ायदा उठाना सही समझा..और अपने हाथो को उसके कयि इंपॉर्टेंट अंगो पे फिराने लगा..मौका देखकर दबा भी देता था..उसके चेहरे पे वही कातिल मुश्कान आ जाती थी…शायद वो मेरे दिमाग़ को अभी पढ़ रही हो….कार अभी दूर थी,”तुमने अपना नेम नही बताया.

“”क्या करोगे जानकार शादी करोगे क्या,,.””इसका मतलब मैं जिन लड़कियो के नाम जानता हूँ उनसे शादी करना पड़ेगा मुझे….””फिर मेरा नाम क्यू पुच्छ रहे हो…””बस यूँ ही समझ लो…और तुम मुझे अपना नाम बताओ..नही तो यही गिरा दूँगा..””पुजा है मेरा नेम..अब खुश…””पुजा….नाइस नेम…”कार अभी भी दूर थी मैं जानबूझ कर धीरे धीरे कार की तरफ बढ़ रहा था…बारिश और तेज हो गयी.

एक जोरदार बिजली फिर आसमान मे काड्की..,वो इस बार ज़्यादा डर गयी और मेरे कंधे को ज़ोर से पकड़ लिया,उसके होंठ मेरे होंठ के करीब आ गये,.उसका पता नही लेकिन मैं गरम हो चुका था..मैं वही खड़ा हो गया..काफ़ी देर तक हम दोनो एक दूसरे की आँखो मे खोए रहे.

मैं अपने थर्कि दिमाग़ से काम ले रहा था..और धीरे धीरे अपना चेहरा उसके करीब ले जा रहा था..और कुछ देर बाद ,एकदम करीब उसके होंठ पे उसकी बारिश की पड़ती एक एक बूँद कयामत ढा रही थी…मैं अपने आप को रोक नही पाया और उसके होंठ पे अपने होंठ टीका दिए…लेकिन वो शांत थी.

मैं अकेले ही उसके होंठो का स्वाद ले रहा था..वो तो जैसे एक ज़िंदा लाश की तरह शांत थी ..कुछ देर बाद मुझे ये सब अजीब लगा..मैने झटके से अपने होंठ अलग किए..वो अब मेरी तरफ देख रही थी..उसके आँख से आन्षू निकल रहे थे मैं ये देख नही पाया बारिश की वजह से..शायद उसने मुझसे ये सब एक्सेप्ट नही किया था.

मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आया…मैं उसे उठाकर कार की तरफ बढ़ गया…कार अभी भी स्टेट हाइवे पे खड़ी थी. मैने कार का गेट खोला और पुजा को अंदर बैठा दिया ड्राइविंग सीट पे..और दूसरी तरफ से आकर मैं भी बैठ गया..बहुत देर तक खामोशी छाई रही,बाहर बारिश अभी भी हो रही थी.

जब कुछ देर और उसने कुछ नही बोला तो मेरे दिल के अंदर बेचैनी होने लगी…उस समय मैं ये भूल गया था कि मैं मुंबई से आगरा जाने के लिए निकला था..उस वक़्त तो मुझे बस उसकी बेचैनी खाए जा रही थी..शायद मुझे उससे प्यार हो गया था,वही प्यार जिसमे मेरे कयि दोस्त देवदास बन गये थे.

फिर मैने ही अपने दिल को मजबूत किया और उसकी तरफ देखा,.,”तुम्हारा पैर कैसा है…”मैने बात की शुरुआत कर ही डाली…वो चुप ही रही..”देखो पुजा आइ आम सॉरी ,जो हुआ अंजाने मे हुआ मैने जानबूझ कर नही किया…”वो जैसे मेरा मन पढ़ने की विधि जान गयी थी,इस बार भी उसने मेरा झूट पकड़ लिया. आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

“सुशील,तुम कोई मौका अपने हाथ से जाने नही देते ना….””पुजा देखो.,आइ आम रियली सोरर…”मैं सॉरी भी नही बोल पाया था कि उसने अपने हाथ मेरे होंठो पे रख दिए…”चुप बिल्कुल चुप..बहुत बोल चुके तुम सुशील अब…”मैं चुप ही रहा..लेकिन अब पुजा रंग मे आ रही थी उसने अपना फेस मेरे फेस के बिल्कुल करीब लाया.

उसके हाथ अभी भी मेरे लब पे थे..कुछ देर तक वो ऐसे ही मुझे देखती रही मेरी आँखो मे कुछ देख रही थी,…फिर उसने अपने हाथ मेरे होंठ से हटाए लेकिन उसने अपने होठ मेरे होंठो पे रख दिया…मैं भला क्यू पिछे हटने वाला था…मैं भी रेस्पोन्से देने लगा…वो बहुत तेज़ी से मेरे होंठो को चूसे जा रही थी..जैसे मुझे खा जाएगी.

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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