वो दिन कभी फिर आया ही नहीं

गतांग से आगे …..

“मैं उसकी बात पे हंस पड़ा ,वो भी मुश्कुरा दी,,उसकी स्माइल सीधे मेरे दिल पे लगी,,ना जाने उसके प्रति मुझे एक अजीब सी फीलिंग हो रही थी..ऐसा आज तक नही हुआ था…और मुझे ये भी नही पता था कि ये लड़की इस कदर मेरे दिल मे उतर जाएगी की इसे दिल से निकालना नामुमकिन हो जाएगा.

कार फुल स्पीड के साथ सड़क पे दौड़ रही थी…मैं कभी कार की खिड़की से बाहर देखता तो कभी उस लड़की तरफ की तरफ, उसके चेहरे पे अजीब सी ख़ुसी झलक रही थी ..जैसे उसने कुछ पा लिया हो..मैं थोड़े आटिट्यूड किस्म का था. मैने सोचा आगे से वो ही बात करे मैं क्यू बात करू,..वो शायद मेरे दिमाग़ को पढ़ रही थी.

मैं जैसे ही उसके बारे मे सोचता उसके होंठो पे स्माइल आ जाती..मैं समझ नही पा रहा था ,इसी तरह चुप चाप वो कार ड्राइविंग करती रही और मैं पहले की तरह ही कार की खिड़की से बाहर देखता रहा..आख़िर उसने हार मान ली,और मेरे तरफ देखकर बोली…”व्हाट ईज़ युवर नेम”

मैने सुना नही उसने क्या बोला..शायद मैने ये उम्मीद छ्चोड़ दी थी कि अब हुमारे बीच बात भी होगी..मैने कहा. “,क्या अपने कुछ कहा…””तुम्हारा नेम क्या है..””सुशील ,”मैने उसकी तरफ देखते हुए कहा और मेरी नज़र एक बार फिर उसके चेहरे से होती हुए,उसके नीचे अटक गयी..मैने मन मे कहा..”क्या माल है.

“उसने जैसे मेरी बात सुन ली हो,उसने होंठो पे एक बार फिर मुश्कान आ गयी….”क्या करते हो…”उसने दोबारा से बातचीत शुरू की.”इंजिनियर हू,..वासवा कंपनी मे काम करता हू..””मुंबई मे रहते हो…””जी हां…””पहले इस रोड से कभी आगरा गये हो…””नही..लेकिन आप ये क्यू पूछ रही है.

“मैने उससे पुछा”मैं तुम्हे मार के खा जाउन्गि..मैं एक प्रेत हू…”इतना कहकर वो हस्ने लगी…”आप हँसती है तो खूबसूरत दिखती है..”मैने अपना काम करना चालू कर दिया था…”क्या वैसे खूबसूरत नही दिखती मैं…”उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा..”नही ऐसी बात नही है…”उसकी आँखे अजीब थी.

उसकी झील से आँखो मे मेरा डूब जाने का मन कर रहा था..लेकिन मुझे उस समय ये नही मालूम था कि मैं पूरा का पूरा उसमे ऐसा डूब जाउन्गा कि मुझे कोई कश्ती भी नही निकल पाएगी…”आपका नेम क्या है…”मैने पुछा.”क्यू…आप मेरा नेम जानकार क्या करेंगे..”उसने जवाब दिया.”फिर आपने मेरा नामे क्यू पुछा.

“मैं भी पिछे हटने के मूड मे नही था…उसके होंटो पे एक बार फिर से स्माइल च्छा गयी..वो धीरे धीरे मेरे दिल मे उतरने लगी थी..”रिया…नेम है मेरा..””आप आगरा मे कहाँ रहती है,.,”मैने उसकी तरफ देख कर पुछा…”अब आपका हमेशा मिलने का इरादा है क्या…”उसने कहा..”तुम ,मेरे सवालो का जवाब घुमा कर क्यू दे रही हो.

“मैने आप की जगह तुम लगाया इसलिए लगाया क्यूकी यदि कुछ करना है तो आप से तुम पे आना पड़ेगा..”आपको फ्लर्ट करने मे बहुत मज़ा आता है ना,कितनी लड़कियो पे ट्राइ कर चुके हो,अभी तक..””तुम शायद पहली हो…” “शायद  “उसने कहा…मैने फिर अपने आप से कहा…”इतना क्यू भाव खा रही है पट जाना.

“उसने जैसे फिर मेरा मन पढ़ लिया हो,उसके चेहरे पे एक बार फिर हँसी की लहर दौड़ गयी…तभी कार धक्के खाते हुए, रुक गयी…उसके चेहरे पे परेशानी सॉफ झलक रही थी..वो कार से बाहर आई..मैं अंदर क्या करता ,मैं भी बाहर आ गया…उसने कार के टाइयर पे एक लात मारी और फिर अपना पैर पकड़ कर बैठ गयी..मुझे हँसी आ गयी.

मैं हस्ने लगा..”तुम हंस क्यू रहे हो…”उसने बनावटी गुस्से से मेरी तरफ देखा…मैने अपनी हँसी रोकी..और उसके पास गया …”अब फिल्मी स्टाइल से टाइयर पे लात मरोगी तो यही हाल होगा…”इतना कहकर मैने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया वो मेरी तरफ ऐसे देखने लगी जैसे मैं कोई भूत हूँ. आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

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