वो दिन कभी फिर आया ही नहीं

सुशील..उठो..लेट हो जाओगे,मेरे कानो मे ये आवाज़ पड़ी तो मैने बुझे हुए मन से बिस्तर छ्चोड़ा..और सीधा बाथरूम मे घुस गया..आधे घंटे बाद मे बाथरूम से निकला..तो रीना ने कहा…”सुशील,भैया…मैने आपका नाश्ता लगा दिया है…जल्दी से कर लो ,आगरा के लिए निकलना भी है.

“मैने हां मे सर हिलाया…और तैयार होने लगा..मैं सुशील ,प्रॉपर आगरा से था,..लेकिन इंजिनियरिंग करने के बाद मेरा प्लेसमेंट मुंबई की कंपनी मे हो गया था, मेरी बहुत अच्छे पोस्ट पे जॉब लगी थी..सब कुछ अच्च्छा चल रहा था…आज मुझे आगरा अपने पापा के पास जाना था.

मैने अपनी कार मे जाने का फ़ैसला किया…रीना, मेरी बहन ने मेरा खाना कार मे रख दिया…मैने अपनी कार स्टार्ट की और निकल पड़ा मुंबई टू आगरा बाइ रोड….आज तक मेरी ज़िंदगी मे ऐसा कोई सफ़र नही था जो यादगार हो..या जो थोड़ा सा भी इंट्रेस्टिंग हो..मैं अपने इस मुंबई तो आगरा की यात्रा को यादगार बनाना चाहता था.

लेकिन मुझे ये नही पता था कि ये सफ़र इतना यादगार बन जाएगा कि ये सफ़र मेरे जेहन से कभी उतर ही नही पाएगा मुंबई से आगरा बाइ रोड तकरीबन 1384 कि.मी. है ,यदि मैण अपनी स्पीड से कार को चलाऊ तो मुझे आगरा पहुचने मे अधिक से अधिक 21 या 44 घंटे लगते…लेकिन मुझे लोंग ड्राइव पसंद थी,ये बात और है कि कभी की नही.

मैं सुयोग रेस्टोरेंट रस्ते में पड़ता है..वहाँ अपनी कार खड़ी की और रेस्टोरेंट के अंदर गया,मैं घर से ब्रेकफास्ट करके निकला था लेकिन मुझे बाहर खाना और फिर अपनी तबीयत खराब करना पसंद है…इसलिए मैने वहाँ से कुछ खाने का समान पॅक करवा लिया…और वापस अपनी कार स्टार्ट करके रोड पे दौड़ा दी.

मैं उस रोड मे आने जाने वालो से ही रास्ता पुछ के बढ़ रहा था और मेरे सबसे अच्छे मददगार साबित हो रहे थे रोड के किनारे लगे हुए. बोर्ड….मैं अभी अपनी कार ड्राइव ही कर रहा था कि मेरी कार धक्के खाती हुई…अचानक रुक गयी..मैं उतना परेशान नही हुआ क्यूकी मेरी ब्रांच मेकॅनिकल थी.

मैं थोड़ा बहुत तो जानता ही था ,कार के बारे मे ,मैं कार से उतरा लेकिन मेरी इंजीनियरिंग. की डिग्री उस वक़्त जवाब दे गयी जब मैने देखा कि कार के दो टाइयर पंक्चर है…अब क्या करू मैने सोचा…काफ़ी देर से कोई वहाँ से गुजरा भी नही था…तभी एक कार आती हुई दिखाई दी मैने हाथ देके रोका.

उसमे एक लड़की जो कि तकरीबन 23 साल की होगी ,वो कार से बाहर आई…”हेलो,क्या हुआ….”उसने मुझसे पुछा,फहीर उसने अपनी नज़र मेरी कार की तरफ घुमाई..तो वो समझ गयी…”कहाँ जाना है आपको ,”उसने मुझसे पुछा…”आगरा….”मैने जवाब दिया..”यहाँ थोड़ी दूर मे एक बस स्टॅंड है.

जहाँ से हर दिन सुबह 8 बजे एक बस आगरा के लिए निकलती है…”इतना कहकर वो वापस अपनी कार मे बैठ गयी…”अजीब लड़की है…”मैने खुद से कहा,वो कार स्टार्ट करके जाने लगी…लेकिन कुछ दूरी जाकर रुक गयी फिर मेरे तरफ कार को रर्वर्स मे लाते हुए ,उसने मुझसे कहा…”यदि आपको ऐतराज ना हो तो ,आप मेरे साथ चल सकते है.

मैं भी आगरा ही जा रही हूँ…”मेरी ख़ुसी का ठिकाना ना रहा ,एक खूबसूरत लड़की के साथ लोंग ड्राइव…मैं बहुत थर्कि किसम का इंसान हूँ ,मेरी नज़र सीधे उसके बूब्स पे टिकी..लेकिन वो नही समझ पाई…मैने उसे थॅंक्स कहा और उसके कार मे बैठ गया…कुछ दूर चलने के बाद मैने उससे पुछा ,”आप पहले भी बाइ रोड जा चुकी है.

आगरा,,,””हां,लेकिन क्यू…””फिर तो आपको ये जगह भी मालूम होगी ,कि कोन सी जगह है ये…””इस प्लेस का तो नही मालूम ,लेकिन अभी कुछ देर पहले..पुराना हनुमान मंदिर गुजरा है..लेकिन आप क्यू पूछ रहे है..कही आपको ये तो नही लग रहा कि मैं आपको भटका दूँगी. आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

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