शादी के बाद दीदी और जीजू की हनीमुन में मै

गतांग से आगे …..

” मेने केमरा पर्स मे से निकला और ओन करके टीवी में जोड़ दिया. और रिमोट कंट्रोल से केमरा ऑपरेट करने लगी. और मेरे होश जब उड़ गए जब उसमे फोटो कि शुरुआत दीदी के हनीमून के फोटो दिखने लगे. असल में दीदी को जिजू ने कहा था कि वो फोटो डिलीट कर देनेगे कैमरे में से…पर ऑफिस जाते समय ऐसा करना भूल गए और केमरा में सुषमा के यहाँ ले गयी और अब वो सारे फोटो सामने टीवी पर दिख रहे थे.

दीदी बेचारी शर्म से लाल हो गयी थीं और जोर जोर से हँसे जा रही थी… और में बिल्कुल मूर्ती कि तरह जड़ हो गयी थी.पहले फोटो में दीदी और जिजू फ्रेंच किस कर रहे थे और दीदी के बूब्स कि झलक भी दिख रही थी…. और शादी के सिर्फ़ ७ दिन बाद मेरा कालेज में प्रवेश के कारण में भी दीदी के घर पहुँच गयी रहने के लिए।

पहले तो दीदी ने काफ़ी मजाक भी उड़ाई मेरे, की क्यों आ गयी यहाँ ? अभी तो हम लोगों ने सही से हनीमून भी नही मनाया और तू यहाँ आया गयी. मेने तो कह दिया की में आप लोगों की बिल्कुल भी डिस्टर्ब नही करुँगी, आप लोग आराम से हनीमून मनाओ.

लगभग १ महिना बड़े मजे से कटा, ख़ूब मजा करते थे हम सभी लोग, ख़ूब धमाल मचाते थे, पर एक दिन जब दीदी और जिजू बाजार शॉपिंग के लिए गए हुए थे और में घर पर अकेली थी। तभी अलमारी की दरवार में एक गुलाबी रंग जी कुछ दिखायी दिया, देखा तो दीदी की पैंटी थी, थी बहुर सुंदर और कामुक डिजाईन की भी.

मेने उसे ध्यान से देखा था तो उसमे कुछ सफ़ेद धब्बे भी थे, मन में कई सवाल उठने लगे..! मन में जिज्ञासा हुयी तो अलमारी को बड़ी सावधानी से देखना शुरू किया तो, अब पाया एक कामसूत्र कॉन्डम का काले रंग का पैकेट. उसमे एक बहुत कामुक फोटो भी रखे थी. अब में उत्तेजित होने लगी थी. बाद में दीदी की साड़ियों के नीचे कई कामुक कहानियो और तस्वीरों की किताबें भी मिलीं, उनमे से मैंने एक किताब निकाल कर अपने पास रख ली.

रात को जब जिजू और दीदी अपने कमरे में जाकर सो गए तो मेने अपने कमरे में दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया और वो किताब निकाल ली. उस किताब का हर एक पेज कामुक तस्वीरों और कहानियो से भरा पड़ा था. पूरी किताब में सेक्स करने की अलग अलग मुद्राएँ और पुरूष और स्त्री की नंगी तसवीरें दे रखी थी. आज से पहले ब्लू फ़िल्म में ही मेने पेनिस (लंड) देखा था , पर इस किताब में बहुत पास से पेनिस की फोटो दे रखी थी.

रात के तीन बज चुके थे, पर आंखों में नींद नही थी. मन मे जीजू और दीदी के शारीरिक मिलन के बारे में विचार आने लगे की क्या वो लोग ऐसे ही सब कुछ करते होंगे जैसा की इस किताब में दे रखा है….हाय दीदी को कितना मजा आता होगा..!?

फिर मन में आया की क्या राहुल का यौनांग भी ऐसा ही होगा, जो की उस दिन उसने मेरे हिप्स के सहारे लगाया था? सारी रात अपनी पूसी (चूत) को हथेलियों से सहलाते हुए ही निकल गयी. और सुबह कब हो गयी, पता ही नही चला!

कॉलेज से लोटने के बाद मन मे सोचा की सिर्फ़ राहुल ही एक ऐसा लड़का है जो शायद मेरे से आकर्षित है, क्या उसके साथ कुछ….? नहीं नहीं …..किसी को पता चला तो…? बहुत सारे सवाल मन में चल रहे थे की अचानक दीदी की आवाज से मेरा ध्यान भंग हुआ. दीदी मुझे खाने पर बुला रहीं थीं. शाम को पुरे मोहल्ले की लाईट चली गयी. जब बड़ी देर तक नही आयी तब दीदी ने कहा की आज हम लोग ऊपर छत पर सो लेते हैं. आप यह कहानी अन्तर्वासना स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है l

छत पर दीदी और जीजू एक फोल्डिंग पलंग पर सो गए और में फर्श पर गद्दे पर सो गयी. रात को जब अचानक मेरी नींद टूटी तो मेने देखा की की मेरी आंखों पर कोई कपड़ा पड़ा है…मैंने आशंकित होते हुए, बड़े साहस के साथ अपनी आंखों को उस कपड़े से हटाते हुए देखने की कोशिश की, तो पाया वो एक बनियान थी….जीजाजी की ही होगी.

सामने फर्श पर दीदी की साड़ी , पेटीकोट, ब्लोउज भी पड़ा हुआ था…..तो क्या इसका मतलब वो दोनों सेक्स कर रहें है और अधनंगे हैं? मेरे को बहुत जोर से टॉयलेट भी आ रही थी…सोच रही थी की अब कैसे उठूँ?अगर वो लोग सेक्स कर रह होंगे तो क्या सोचेगें? फिर जब मेने फोल्डिंग पलंग के हिलने की आवाज सूनी तो धीरे धीरे आंखें पलंग के ऊपर सो रह दोनों जनों पर डालीं.

क्या दृश्य था? जीजाजी पलंग पर सिर्फ़ अंडरवियर में लेते थे और दीदी भी सिर्फ़ पैंटी में उनके जाँघों पर बैठी हुईं थीं. दीदी के स्तनों को जीजाजी ने अपने दोनों हाथों से दबाया हुआ था, और दीदी के मुह से सिस्कारियां निकल रही थीं. दीदी बार बार अपने चूतड ऊपर नीचे कर रही थी , और शायद उनके नीचे जीजाजी का लंड होगा.

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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